वे, विशाल स्वर्ग का आनंद लेने के बाद, अपनी पुण्य समाप्त होने पर मृत्यु लोक में प्रवेश करते हैं; इस प्रकार तीनों वेदों के आदेशों का पालन करके और इच्छाओं की इच्छा रखते हुए, वे आने-जाने की अवस्था को प्राप्त करते हैं।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
9.21 ते वे? तम् वह? भुक्त्वा आनंद लेकर? स्वर्गलोकम् स्वर्ग लोक? विशालम् विशाल? क्षीणे समाप्ति पर? पुण्ये पुण्य की? मर्त्यलोकम् मृत्यु का लोक? विशन्ति प्रवेश करते हैं? एवम् इस प्रकार? त्रयीधर्मम् तीनों वेदों का? अनुप्रपन्नाः पालन करते हुए? गतागतम् आने-जाने की अवस्था? कामकामाः इच्छाओं की इच्छा वाले? लभन्ते प्राप्त करते हैं।टिप्पणी जब संचित पुण्य (स्वर्गीय सुखों का कारण) समाप्त हो जाता है, तो वे इस लोक में उतरते हैं। वे आते-जाते रहते हैं। उनके पास कोई स्वतंत्रता नहीं है।तीनों वेदों का धर्म केवल वैदिक अनुष्ठान, तीनों वेदों द्वारा आदेशित। कामकामाः वह लोग जिनका मन वासनाओं या सांसारिक प्रवृत्तियों से भरा हुआ है।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।
9.21 ते वे? तम् वह? भुक्त्वा आनंद लेकर? स्वर्गलोकम् स्वर्ग लोक? विशालम् विशाल? क्षीणे समाप्ति पर? पुण्ये पुण्य की? मर्त्यलोकम् मृत्यु का लोक? विशन्ति प्रवेश करते हैं? एवम् इस प्रकार? त्रयीधर्मम् तीनों वेदों का? अनुप्रपन्नाः पालन करते हुए? गतागतम् आने-जाने की अवस्था? कामकामाः इच्छाओं की इच्छा वाले? लभन्ते प्राप्त करते हैं।टिप्पणी जब संचित पुण्य (स्वर्गीय सुखों का कारण) समाप्त हो जाता है, तो वे इस लोक में उतरते हैं। वे आते-जाते रहते हैं। उनके पास कोई स्वतंत्रता नहीं है।तीनों वेदों का धर्म केवल वैदिक अनुष्ठान, तीनों वेदों द्वारा आदेशित। कामकामाः वह लोग जिनका मन वासनाओं या सांसारिक प्रवृत्तियों से भरा हुआ है।