मूर्ख मुझे, अव्यक्त को, प्रकट रूप में आया हुआ समझते हैं, मेरी उच्चतर, अविनाशी और सर्वश्रेष्ठ प्रकृति को न जानते हुए।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
7.24 अव्यक्तम् अप्रकट? व्यक्तिम् प्रकटीकरण को? आपन्नम् प्राप्त? मन्यन्ते समझते हैं? माम् मुझे? अबुद्धयः मूर्ख? परम् सर्वोच्च? भावम् प्रकृति? अजानन्तः न जानते हुए? मम मेरी? अव्ययम् अविनाशी? अनुत्तमम् सर्वश्रेष्ठ।व्याख्या अज्ञानी लोग कृष्ण को एक सामान्य मनुष्य समझते हैं। वे सोचते हैं कि वह पिछले जन्म के कर्मों के बल से सामान्य मानव प्राणियों की तरह अप्रकट अवस्था से शरीर धारण करते हैं। उन्हें परम आत्मा के रूप में उनकी उच्चतर, अविनाशी और स्वप्रकाश प्रकृति का कोई ज्ञान नहीं है। वे सोचते हैं कि वह केवल अभी प्रकटीकरण में आए हैं, यद्यपि वह स्व-अस्तित्व, सनातन, अनादि, अनंत, जन्मरहित, मृत्युरहित, अपरिवर्तनीय और अनंत हैं।
इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें
यह श्लोक आपके भीतर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।
7.24 अव्यक्तम् अप्रकट? व्यक्तिम् प्रकटीकरण को? आपन्नम् प्राप्त? मन्यन्ते समझते हैं? माम् मुझे? अबुद्धयः मूर्ख? परम् सर्वोच्च? भावम् प्रकृति? अजानन्तः न जानते हुए? मम मेरी? अव्ययम् अविनाशी? अनुत्तमम् सर्वश्रेष्ठ।व्याख्या अज्ञानी लोग कृष्ण को एक सामान्य मनुष्य समझते हैं। वे सोचते हैं कि वह पिछले जन्म के कर्मों के बल से सामान्य मानव प्राणियों की तरह अप्रकट अवस्था से शरीर धारण करते हैं। उन्हें परम आत्मा के रूप में उनकी उच्चतर, अविनाशी और स्वप्रकाश प्रकृति का कोई ज्ञान नहीं है। वे सोचते हैं कि वह केवल अभी प्रकटीकरण में आए हैं, यद्यपि वह स्व-अस्तित्व, सनातन, अनादि, अनंत, जन्मरहित, मृत्युरहित, अपरिवर्तनीय और अनंत हैं।