इस प्रकार मन को सदा संतुलित रखते हुए योगी, नियंत्रित मन वाला, मुझमें निवास करने वाली, मुक्ति में परिणत होने वाली शांति को प्राप्त करता है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
6.15 युञ्जन् संतुलित करते हुए? एवम् इस प्रकार? सदा सदा? आत्मानम् आत्मा को? योगी योगी? नियतमानसः नियंत्रित मन वाला? शान्तिम् शांति को? निर्वाणपरमाम् जो निर्वाण (मोक्ष) में परिणत होती है? मत्संस्थाम् मुझमें निवास करने वाली? अधिगच्छति प्राप्त करता है।टिप्पणी इसी प्रकार जैसे पिछले श्लोक में वर्णित किया गया है।परमात्मा शांति का प्रतीक है। वह शांति का महासागर है। जब कोई मन के विकारों को नियंत्रित करके और उसे सदा संतुलित रखकर शाश्वत की परम शांति को प्राप्त करता है, तो वह मुक्ति या सिद्धि को प्राप्त करता है।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।
6.15 युञ्जन् संतुलित करते हुए? एवम् इस प्रकार? सदा सदा? आत्मानम् आत्मा को? योगी योगी? नियतमानसः नियंत्रित मन वाला? शान्तिम् शांति को? निर्वाणपरमाम् जो निर्वाण (मोक्ष) में परिणत होती है? मत्संस्थाम् मुझमें निवास करने वाली? अधिगच्छति प्राप्त करता है।टिप्पणी इसी प्रकार जैसे पिछले श्लोक में वर्णित किया गया है।परमात्मा शांति का प्रतीक है। वह शांति का महासागर है। जब कोई मन के विकारों को नियंत्रित करके और उसे सदा संतुलित रखकर शाश्वत की परम शांति को प्राप्त करता है, तो वह मुक्ति या सिद्धि को प्राप्त करता है।