जो आत्मनियंत्रित तपस्वी हैं, जो इच्छा और क्रोध से मुक्त हैं, जिन्होंने अपने विचारों को नियंत्रित कर लिया है और जिन्होंने आत्म को जान लिया है, उनके लिए सभी ओर से पूर्ण स्वतंत्रता (या ब्रह्मिक आनंद) विद्यमान रहती है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ एक ही स्रोत से। स्रोत
5.26 कामक्रोधवियुक्तानाम् जो इच्छा और क्रोध से मुक्त हैं? यतीनाम् आत्मनियंत्रित तपस्वियों के? यतचेतसाम् जिन्होंने अपने विचारों को नियंत्रित किया है? अभितः सभी ओर से? ब्रह्मनिर्वाणम् पूर्ण स्वतंत्रता? वर्तते विद्यमान रहती है? विदितात्मनाम् जिन्होंने आत्म को जान लिया है।टिप्पणी जो सभी कार्यों का त्याग करते हैं और श्रवण (शास्त्रों का श्रवण)? मनन (चिंतन) और निदिध्यासन (ध्यान) का अभ्यास करते हैं? जो ब्रह्म में प्रतिष्ठित हैं या जो आत्मज्ञान के प्रति दृढ़ हैं, वे तुरंत मुक्ति या कैवल्य मोक्ष को प्राप्त करते हैं। कर्म योग चरणबद्ध तरीके से मोक्ष की ओर ले जाता है (क्रम मुक्ति)। पहले मन की शुद्धि आती है, फिर ज्ञान, फिर सभी कार्यों का त्याग और अंत में मोक्ष।
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5.26 कामक्रोधवियुक्तानाम् जो इच्छा और क्रोध से मुक्त हैं? यतीनाम् आत्मनियंत्रित तपस्वियों के? यतचेतसाम् जिन्होंने अपने विचारों को नियंत्रित किया है? अभितः सभी ओर से? ब्रह्मनिर्वाणम् पूर्ण स्वतंत्रता? वर्तते विद्यमान रहती है? विदितात्मनाम् जिन्होंने आत्म को जान लिया है।टिप्पणी जो सभी कार्यों का त्याग करते हैं और श्रवण (शास्त्रों का श्रवण)? मनन (चिंतन) और निदिध्यासन (ध्यान) का अभ्यास करते हैं? जो ब्रह्म में प्रतिष्ठित हैं या जो आत्मज्ञान के प्रति दृढ़ हैं, वे तुरंत मुक्ति या कैवल्य मोक्ष को प्राप्त करते हैं। कर्म योग चरणबद्ध तरीके से मोक्ष की ओर ले जाता है (क्रम मुक्ति)। पहले मन की शुद्धि आती है, फिर ज्ञान, फिर सभी कार्यों का त्याग और अंत में मोक्ष।