स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः |
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ||४-३||
sa evāyaṃ mayā te.adya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ .
bhakto.asi me sakhā ceti rahasyaṃ hyetaduttamam ||4-3||
वह यही प्राचीन योग है जो मैंने आज तुम्हें सिखाया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो; यह सर्वोच्च रहस्य है।
हिंदी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
4.3 सः वह? एव ही? अयम् यह? मया मेरे द्वारा? ते तुम्हें? अद्य आज? योगः योग? प्रोक्तः सिखाया गया है? पुरातनः प्राचीन? भक्तः भक्त? असि तुम हो? मे मेरे? सखा मित्र? च और? इति इस प्रकार? रहस्यम् रहस्य? हि क्योंकि? एतत् यह? उत्तमम् सर्वश्रेष्ठ।टिप्पणी यह योग गहरी और सूक्ष्म शिक्षाओं से युक्त है। इसलिए यह सर्वोच्च रहस्य है जो भगवान द्वारा प्रकट किया जाता है।
Ananda के साथ इस श्लोक पर विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से सहायता लेते हैं और आपके अपने मार्ग को सम्मानित करते हैं।
4.3 सः वह? एव ही? अयम् यह? मया मेरे द्वारा? ते तुम्हें? अद्य आज? योगः योग? प्रोक्तः सिखाया गया है? पुरातनः प्राचीन? भक्तः भक्त? असि तुम हो? मे मेरे? सखा मित्र? च और? इति इस प्रकार? रहस्यम् रहस्य? हि क्योंकि? एतत् यह? उत्तमम् सर्वश्रेष्ठ।टिप्पणी यह योग गहरी और सूक्ष्म शिक्षाओं से युक्त है। इसलिए यह सर्वोच्च रहस्य है जो भगवान द्वारा प्रकट किया जाता है।