अन्य लोग बाहर जाने वाली प्राण को अंदर आने वाली प्राण में बलिदान करते हैं, और अंदर आने वाली को बाहर जाने वाली में, बाहर जाने वाली और अंदर आने वाली प्राण के प्रवाह को रोकते हुए, प्राण का नियंत्रण करने में पूर्णतः समर्पित रहते हैं।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दार्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
4.29 अपाने बाहर जाने वाली प्राण में? जुह्वति बलिदान करते हैं? प्राणम् अंदर आने वाली प्राण? प्राणे अंदर आने वाली प्राण में? अपानम् बाहर जाने वाली प्राण? तथा इस प्रकार? अपरे अन्य? प्राणापानगती बाहर जाने वाली और अंदर आने वाली प्राण के प्रवाह? रुद्ध्वा रोकते हुए? प्राणायामपरायणाः प्राण के नियंत्रण में पूर्णतः समर्पित।टिप्पणी कुछ योगी पूरक (श्वास अंदर लेना) का अभ्यास करते हैं? कुछ योगी रेचक (श्वास बाहर निकालना) का अभ्यास करते हैं?, और कुछ योगी कुंभक (श्वास को रोकना) का अभ्यास करते हैं। प्राणायाम के अभ्यास द्वारा पाँच उप-प्राणों और अन्य प्राणों को मुख्य प्राण (मुख्य प्राण) में विलीन कर दिया जाता है। जब प्राण को नियंत्रित किया जाता है? मन भी अपनी भटकन को रोक देता है और स्थिर हो जाता है? इंद्रियाँ भी पतली पड़ जाती हैं और प्राण में विलीन हो जाती हैं। प्राण की कंपन के माध्यम से ही मन और इंद्रियों की गतिविधियाँ जारी रहती हैं। यदि प्राण को नियंत्रित किया जाता है? तो मन? बुद्धि और इंद्रियाँ कार्य करना बंद कर देती हैं।
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4.29 अपाने बाहर जाने वाली प्राण में? जुह्वति बलिदान करते हैं? प्राणम् अंदर आने वाली प्राण? प्राणे अंदर आने वाली प्राण में? अपानम् बाहर जाने वाली प्राण? तथा इस प्रकार? अपरे अन्य? प्राणापानगती बाहर जाने वाली और अंदर आने वाली प्राण के प्रवाह? रुद्ध्वा रोकते हुए? प्राणायामपरायणाः प्राण के नियंत्रण में पूर्णतः समर्पित।टिप्पणी कुछ योगी पूरक (श्वास अंदर लेना) का अभ्यास करते हैं? कुछ योगी रेचक (श्वास बाहर निकालना) का अभ्यास करते हैं?, और कुछ योगी कुंभक (श्वास को रोकना) का अभ्यास करते हैं। प्राणायाम के अभ्यास द्वारा पाँच उप-प्राणों और अन्य प्राणों को मुख्य प्राण (मुख्य प्राण) में विलीन कर दिया जाता है। जब प्राण को नियंत्रित किया जाता है? मन भी अपनी भटकन को रोक देता है और स्थिर हो जाता है? इंद्रियाँ भी पतली पड़ जाती हैं और प्राण में विलीन हो जाती हैं। प्राण की कंपन के माध्यम से ही मन और इंद्रियों की गतिविधियाँ जारी रहती हैं। यदि प्राण को नियंत्रित किया जाता है? तो मन? बुद्धि और इंद्रियाँ कार्य करना बंद कर देती हैं।