कुछ लोग श्रवण और अन्य इंद्रियों को संयम की अग्नि में बलिदान करते हैं; अन्य लोग शब्द और अन्य संवेदनाओं को इंद्रियों की अग्नि में बलिदान करते हैं।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
4.26 श्रोत्रादीनि इन्द्रियाणि श्रवण और अन्य इंद्रियां? अन्ये अन्य? संयमाग्निषु संयम की अग्नि में? जुह्वति बलिदान करते हैं? शब्दादीन् विषयान् ध्वनि जैसी संवेदनाएं? आदि? अन्ये अन्य? इन्द्रियाग्निषु इंद्रियों की अग्नि में? जुह्वति बलिदान करते हैं। टिप्पणी कुछ योगी लगातार इंद्रियों को संयमित करने में जुटे रहते हैं। वे अपनी इंद्रियों को आत्मा के निर्देशन में संगठित करते हैं और उन्हें संवेदनशील वस्तुओं के संपर्क में नहीं आने देते हैं। यह भी एक बलिदान का कार्य है। अन्य लोग अपनी इंद्रियों को केवल शुद्ध और अनुमत संवेदना की वस्तुओं की ओर निर्देशित करते हैं। यह भी एक प्रकार का बलिदान है।
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4.26 श्रोत्रादीनि इन्द्रियाणि श्रवण और अन्य इंद्रियां? अन्ये अन्य? संयमाग्निषु संयम की अग्नि में? जुह्वति बलिदान करते हैं? शब्दादीन् विषयान् ध्वनि जैसी संवेदनाएं? आदि? अन्ये अन्य? इन्द्रियाग्निषु इंद्रियों की अग्नि में? जुह्वति बलिदान करते हैं। टिप्पणी कुछ योगी लगातार इंद्रियों को संयमित करने में जुटे रहते हैं। वे अपनी इंद्रियों को आत्मा के निर्देशन में संगठित करते हैं और उन्हें संवेदनशील वस्तुओं के संपर्क में नहीं आने देते हैं। यह भी एक बलिदान का कार्य है। अन्य लोग अपनी इंद्रियों को केवल शुद्ध और अनुमत संवेदना की वस्तुओं की ओर निर्देशित करते हैं। यह भी एक प्रकार का बलिदान है।