जो इस दुनिया में कर्म की सफलता की कामना करते हैं, वे देवताओं को बलिदान देते हैं; क्योंकि मनुष्य के लिए कर्म के माध्यम से सफलता शीघ्र ही प्राप्त हो जाती है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
4.12 काङ्क्षन्तः जो कामना करते हैं? कर्मणाम् कर्मों की? सिद्धिम् सफलता? यजन्ते बलिदान देते हैं? इह इस? देवताः देवताओं को? क्षिप्रम् शीघ्र? हि क्योंकि? मानुषे मानव में? लोके संसार में? सिद्धिः सफलता? भवति प्राप्त होती है? कर्मजा कर्म से जन्मी। टिप्पणी आत्मज्ञान या आत्मबोधि तक पहुंचना बहुत कठिन है। इसके लिए पूर्ण संन्यास की आवश्यकता होती है। साधक के पास चार साधन और कई अन्य गुण होने चाहिए? और निरंतर तथा गहन ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। लेकिन सांसारिक सफलता शीघ्र और आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
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4.12 काङ्क्षन्तः जो कामना करते हैं? कर्मणाम् कर्मों की? सिद्धिम् सफलता? यजन्ते बलिदान देते हैं? इह इस? देवताः देवताओं को? क्षिप्रम् शीघ्र? हि क्योंकि? मानुषे मानव में? लोके संसार में? सिद्धिः सफलता? भवति प्राप्त होती है? कर्मजा कर्म से जन्मी। टिप्पणी आत्मज्ञान या आत्मबोधि तक पहुंचना बहुत कठिन है। इसके लिए पूर्ण संन्यास की आवश्यकता होती है। साधक के पास चार साधन और कई अन्य गुण होने चाहिए? और निरंतर तथा गहन ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। लेकिन सांसारिक सफलता शीघ्र और आसानी से प्राप्त की जा सकती है।