ye yathā māṃ prapadyante tāṃstathaiva bhajāmyaham .
mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ ||4-11||
जो जिस प्रकार मेरी शरण लेते हैं, मैं उन्हें उसी प्रकार फल देता हूँ; हे अर्जुन, मनुष्य सभी प्रकार से मेरे मार्ग का अनुसरण करते हैं।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
4.11 ये कौन? यथा जिस प्रकार? माम् मेरी? प्रपद्यन्ते शरण लेते हैं? तान् उन्हें? तथा उसी प्रकार? एव ही? भजामि फल देता हूँ? अहम् मैं? मम मेरे? वर्त्म मार्ग? अनुवर्तन्ते अनुसरण करते हैं? मनुष्याः मनुष्य? पार्थ हे पार्थ? सर्वशः सभी प्रकार से।टिप्पणी मैं मनुष्यों को उनके अनुरूप और उनके द्वारा मेरी आराधना की प्रेरणा के अनुसार वांछित वस्तुएँ देता हूँ। यदि कोई स्वार्थी भावना से मेरी पूजा करता है तो मैं उसे वांछित वस्तुएँ देता हूँ। यदि वह निःस्वार्थ भाव से आत्मज्ञान के लिए मेरी पूजा करता है, तो मैं उसे मोक्ष देता हूँ। मैं किसी के प्रति पक्षपाती नहीं हूँ। (cf.VII.21 और IX.23)।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से सिद्धांत लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।
4.11 ये कौन? यथा जिस प्रकार? माम् मेरी? प्रपद्यन्ते शरण लेते हैं? तान् उन्हें? तथा उसी प्रकार? एव ही? भजामि फल देता हूँ? अहम् मैं? मम मेरे? वर्त्म मार्ग? अनुवर्तन्ते अनुसरण करते हैं? मनुष्याः मनुष्य? पार्थ हे पार्थ? सर्वशः सभी प्रकार से।टिप्पणी मैं मनुष्यों को उनके अनुरूप और उनके द्वारा मेरी आराधना की प्रेरणा के अनुसार वांछित वस्तुएँ देता हूँ। यदि कोई स्वार्थी भावना से मेरी पूजा करता है तो मैं उसे वांछित वस्तुएँ देता हूँ। यदि वह निःस्वार्थ भाव से आत्मज्ञान के लिए मेरी पूजा करता है, तो मैं उसे मोक्ष देता हूँ। मैं किसी के प्रति पक्षपाती नहीं हूँ। (cf.VII.21 और IX.23)।