वे कहते हैं कि इन्द्रियां श्रेष्ठ हैं (शरीर से); इन्द्रियों से श्रेष्ठ मन है; मन से श्रेष्ठ बुद्धि है; जो बुद्धि से भी श्रेष्ठ है वह आत्मा (स्व) है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
3.42 इन्द्रियाणि इन्द्रियां? पराणि श्रेष्ठ? आहुः (वे) कहते हैं? इन्द्रियेभ्यः इन्द्रियों से? परम् श्रेष्ठ? मनः मन? मनसः मन से? तु लेकिन? परा श्रेष्ठ? बुद्धिः बुद्धि? यः जो? बुद्धेः बुद्धि से? परतः महान? तु लेकिन? सः वह। व्याख्या जब भौतिक शरीर की तुलना में की जाए जो सकल? बाहरी और सीमित है? इन्द्रियां निश्चित रूप से श्रेष्ठ हैं क्योंकि वे अधिक सूक्ष्म? आंतरिक हैं और क्रिया की व्यापक श्रेणी रखती हैं। मन इन्द्रियों से श्रेष्ठ है? क्योंकि इन्द्रियां मन की सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से कुछ नहीं कर सकतीं। मन पांचों इन्द्रियों के कार्य कर सकता है। बुद्धि मन से श्रेष्ठ है क्योंकि वह विवेक की शक्ति से संपन्न है। जब मन संदेह की अवस्था में हो? बुद्धि उसकी सहायता के लिए आती है। आत्मा? साक्षी? बुद्धि से भी श्रेष्ठ है? क्योंकि बुद्धि आत्मा से अपना प्रकाश उधार लेती है।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।
3.42 इन्द्रियाणि इन्द्रियां? पराणि श्रेष्ठ? आहुः (वे) कहते हैं? इन्द्रियेभ्यः इन्द्रियों से? परम् श्रेष्ठ? मनः मन? मनसः मन से? तु लेकिन? परा श्रेष्ठ? बुद्धिः बुद्धि? यः जो? बुद्धेः बुद्धि से? परतः महान? तु लेकिन? सः वह। व्याख्या जब भौतिक शरीर की तुलना में की जाए जो सकल? बाहरी और सीमित है? इन्द्रियां निश्चित रूप से श्रेष्ठ हैं क्योंकि वे अधिक सूक्ष्म? आंतरिक हैं और क्रिया की व्यापक श्रेणी रखती हैं। मन इन्द्रियों से श्रेष्ठ है? क्योंकि इन्द्रियां मन की सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से कुछ नहीं कर सकतीं। मन पांचों इन्द्रियों के कार्य कर सकता है। बुद्धि मन से श्रेष्ठ है क्योंकि वह विवेक की शक्ति से संपन्न है। जब मन संदेह की अवस्था में हो? बुद्धि उसकी सहायता के लिए आती है। आत्मा? साक्षी? बुद्धि से भी श्रेष्ठ है? क्योंकि बुद्धि आत्मा से अपना प्रकाश उधार लेती है।