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भगवद्गीता 3.40

इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते | एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम् ||३-४०||
indriyāṇi mano buddhirasyādhiṣṭhānamucyate . etairvimohayatyeṣa jñānamāvṛtya dehinam ||3-40||
इंद्रियां, मन और बुद्धि इसका आसन कहे जाते हैं; इन के द्वारा यह ज्ञान को आवृत कर देही को मोहित करता है।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत

3.40 इन्द्रियाणि इंद्रियां? मनः मन? बुद्धिः बुद्धि? अस्य इसका? अधिष्ठानम् आसन? उच्यते कहे जाते हैं? एतैः इन के द्वारा? विमोहयति मोहित करता है? एषः यह? ज्ञानम् ज्ञान? आवृत्य आवृत कर? देहिनम् देही को।टिप्पणी यदि शत्रु का निवास ज्ञात हो तो उसे मारना आसान हो जाता है। इसलिए भगवान कृष्ण एक बुद्धिमान सेनापति की तरह अर्जुन को इच्छा का निवास बताते हैं ताकि वह उस पर आक्रमण कर सके और उसे आसानी से मार सके।

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