अर्जुन ने कहा: परंतु हे वार्ष्णेय (कृष्ण), मनुष्य किस वश में होकर अपनी इच्छा के विरुद्ध पाप का कार्य करता है, मानो किसी बल द्वारा प्रेरित हो?
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
3.36 अथ अब? केन किससे? प्रयुक्तः प्रेरित? अयम् यह? पापम् पाप? चरति करता है? पूरुषः मनुष्य? अनिच्छन् न चाहते हुए? अपि यहाँ तक कि? वार्ष्णेय हे वार्ष्णेय? बलात् बल द्वारा? इव मानो? नियोजितः बाध्य। टीका वार्ष्णेय वह जो वृष्णि परिवार में जन्मा, कृष्ण का एक नाम।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आते हैं और आपके अपने मार्ग को सम्मान देते हैं।
3.36 अथ अब? केन किससे? प्रयुक्तः प्रेरित? अयम् यह? पापम् पाप? चरति करता है? पूरुषः मनुष्य? अनिच्छन् न चाहते हुए? अपि यहाँ तक कि? वार्ष्णेय हे वार्ष्णेय? बलात् बल द्वारा? इव मानो? नियोजितः बाध्य। टीका वार्ष्णेय वह जो वृष्णि परिवार में जन्मा, कृष्ण का एक नाम।