One Source Sangha को इंस्टॉल करें बेहतर अनुभव के लिए

भगवद् गीता 3.30

मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा | निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ||३-३०||
mayi sarvāṇi karmāṇi saṃnyasyādhyātmacetasā . nirāśīrnirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ ||3-30||
मुझमें सभी कर्मों का समर्पण करते हुए, आत्म-चेतना में केंद्रित मन से, आशा और अहंकार से मुक्त होकर, और मानसिक व्यथा से रहित होकर, तुम युद्ध करो।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत

3.30 मयि मुझमें? सर्वाणि सभी? कर्माणि कर्म? संन्यस्य समर्पण करते हुए? अध्यात्मचेतसा आत्म-चेतना में केंद्रित मन से? निराशीः आशा से मुक्त? निर्ममः अहंकार से मुक्त? भूत्वा होकर युध्यस्व युद्ध करो? विगतज्वरः मानसिक व्यथा से मुक्त।टिप्पणी सभी कर्मों को मुझे समर्पित करो इस विचार के साथ कि मैं प्रभु के लिए सभी कर्मों का पालन करता हूँ। व्यथा का अर्थ है दुःख, शोक। (cf.V.10XVIII.66)।

इस श्लोक पर Ananda के साथ ध्यान करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से ज्ञान लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक मार्ग, एक प्रश्न, हर रविवार। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी