भोजन से सभी प्राणी उत्पन्न होते हैं; वर्षा से भोजन का उत्पादन होता है; यज्ञ से वर्षा आती है और यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
3.14 अन्नात् भोजन से? भवन्ति उत्पन्न होते हैं? भूतानि प्राणी? पर्जन्यात् वर्षा से? अन्नसम्भवः भोजन का उत्पादन? यज्ञात् यज्ञ से? भवति आती है? पर्जन्यः वर्षा? यज्ञः यज्ञ? कर्मसमुद्भवः कर्म से उत्पन्न।व्याख्या यहाँ यज्ञ का अर्थ अपूर्व या सूक्ष्म सिद्धांत है या यज्ञ का अदृश्य रूप है जो यज्ञ के प्रदर्शन के समय और इसके फल प्रकट होने के समय के बीच ग्रहण करता है।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आकर्षण लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।
3.14 अन्नात् भोजन से? भवन्ति उत्पन्न होते हैं? भूतानि प्राणी? पर्जन्यात् वर्षा से? अन्नसम्भवः भोजन का उत्पादन? यज्ञात् यज्ञ से? भवति आती है? पर्जन्यः वर्षा? यज्ञः यज्ञ? कर्मसमुद्भवः कर्म से उत्पन्न।व्याख्या यहाँ यज्ञ का अर्थ अपूर्व या सूक्ष्म सिद्धांत है या यज्ञ का अदृश्य रूप है जो यज्ञ के प्रदर्शन के समय और इसके फल प्रकट होने के समय के बीच ग्रहण करता है।