अर्जुन ने कहा — हे कृष्ण! यदि तुम्हारी दृष्टि में ज्ञान कर्म से श्रेष्ठ है, तो हे केशव! तुम मुझे इस भयानक कर्म में क्यों नियुक्त कर रहे हो?
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी सिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दार्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
3.1 ज्यायसी श्रेष्ठ? चेत् यदि? कर्मणः कर्म से? ते तुम्हारी? मता राय? बुद्धिः ज्ञान? जनार्दन हे जनार्दन? तत् तब? किम् क्यों? कर्मणि कर्म में? घोरे भयानक? माम् मुझे? नियोजयसि नियुक्त करते हो? केशव हे केशव।टिप्पणी अध्याय II के श्लोक 49, 50 और 51 में भगवान कृष्ण ने बुद्धि योग के बारे में बहुत ऊँची बातें कही हैं। वह फिर से अर्जुन से युद्ध करने को कहते हैं। इसी कारण अर्जुन अब भ्रांत हैं।
आनंद के साथ इस श्लोक पर विचार करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद अनेक परंपराओं से प्रेरणा लेता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।
3.1 ज्यायसी श्रेष्ठ? चेत् यदि? कर्मणः कर्म से? ते तुम्हारी? मता राय? बुद्धिः ज्ञान? जनार्दन हे जनार्दन? तत् तब? किम् क्यों? कर्मणि कर्म में? घोरे भयानक? माम् मुझे? नियोजयसि नियुक्त करते हो? केशव हे केशव।टिप्पणी अध्याय II के श्लोक 49, 50 और 51 में भगवान कृष्ण ने बुद्धि योग के बारे में बहुत ऊँची बातें कही हैं। वह फिर से अर्जुन से युद्ध करने को कहते हैं। इसी कारण अर्जुन अब भ्रांत हैं।