बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

भगवद् गीता 2.3

क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते | क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ||२-३||
klaibyaṃ mā sma gamaḥ pārtha naitattvayyupapadyate . kṣudraṃ hṛdayadaurbalyaṃ tyaktvottiṣṭha parantapa ||2-3||
अर्जुन, पृथा के पुत्र, दुर्बलता को मत प्राप्त हो। यह तुम्हें शोभा नहीं देता। इस हृदय की तुच्छ कमजोरी को त्याग दो! शत्रुओं के संहारक, उठ जाओ!

अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द अर्थ उसी स्रोत से। स्रोत

2.3 क्लैब्यम् दुर्बलता? मा स्म गमः को प्राप्त न हो? पार्थ हे पार्थ? न नहीं? एतत् यह? त्वयि तुम में? उपपद्यते शोभा देता है? क्षुद्रम् तुच्छ? हृदयदौर्बल्यम् हृदय की कमजोरी? त्यक्त्वा त्याग कर? उत्तिष्ठ उठ जाओ? परन्तप हे शत्रुओं के संहारक। कोई टिप्पणी नहीं।

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कोई भी प्रश्न पूछें — आनंद कई परंपराओं से प्रकाश लाते हैं और आपके मार्ग का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक श्लोक, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी