किंतु यदि तुम इसे (आत्मा को) सदा जन्म लेने वाला और सदा मरने वाला समझते हो, तब भी, हे महाबाहो, तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।
हिंदी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
2.26 अथ अब? च और? एनम् यह (आत्मा)? नित्यजातम् सदा जन्म लेने वाला? नित्यम् सदा? वा या? मन्यसे समझते हो? मृतम् मृत? तथापि तब भी? त्वम् तुम? महाबाहो हे महाबाहो? न नहीं? एवम् इस प्रकार? शोचितुम् शोक करना? अर्हसि योग्य हो।व्याख्या यहाँ भगवान कृष्ण तर्क के लिए लोकप्रिय मान्यता को मानते हैं। मान लीजिए कि आत्मा जब भी शरीर का जन्म होता है तब बार-बार जन्म लेती है, और जब भी शरीर की मृत्यु होती है तब बार-बार मरती है, हे महाबाहो (हे अर्जुन जो महान शक्ति और बल के धनी हो), तब भी तुम्हें इस प्रकार शोक नहीं करना चाहिए, क्योंकि जो मृत्यु को प्राप्त है उसके लिए जन्म अनिवार्य है और जो जन्म लेता है उसके लिए मृत्यु अनिवार्य है। यह प्रकृति का अपरिवर्तनीय और निरपेक्ष नियम है।
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2.26 अथ अब? च और? एनम् यह (आत्मा)? नित्यजातम् सदा जन्म लेने वाला? नित्यम् सदा? वा या? मन्यसे समझते हो? मृतम् मृत? तथापि तब भी? त्वम् तुम? महाबाहो हे महाबाहो? न नहीं? एवम् इस प्रकार? शोचितुम् शोक करना? अर्हसि योग्य हो।व्याख्या यहाँ भगवान कृष्ण तर्क के लिए लोकप्रिय मान्यता को मानते हैं। मान लीजिए कि आत्मा जब भी शरीर का जन्म होता है तब बार-बार जन्म लेती है, और जब भी शरीर की मृत्यु होती है तब बार-बार मरती है, हे महाबाहो (हे अर्जुन जो महान शक्ति और बल के धनी हो), तब भी तुम्हें इस प्रकार शोक नहीं करना चाहिए, क्योंकि जो मृत्यु को प्राप्त है उसके लिए जन्म अनिवार्य है और जो जन्म लेता है उसके लिए मृत्यु अनिवार्य है। यह प्रकृति का अपरिवर्तनीय और निरपेक्ष नियम है।