अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
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2.18 अन्तवन्तः नश्वर? इमे ये? देहाः शरीर? नित्यस्य नित्य? उक्ताः कहे जाते हैं? शरीरिणः आत्मा के? अनाशिनः अविनाशी? अप्रमेयस्य अपरिमेय? तस्मात् इसलिए? युध्यस्व युद्ध करो? भारत हे भारत। व्याख्या -- भगवान कृष्ण अर्जुन को सर्वव्यापी, अमर आत्मा की प्रकृति को विभिन्न तरीकों से समझाते हैं और इस प्रकार उसे युद्ध करने के लिए प्रेरित करते हैं, उसके मोह, दुःख और हताशा को दूर करते हैं जो अज्ञान से उत्पन्न होती हैं।