बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha को इंस्टॉल करें

भगवद् गीता 2.1

सञ्जय उवाच | तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् | विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ||२-१||
sañjaya uvāca . taṃ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam . viṣīdantamidaṃ vākyamuvāca madhusūdanaḥ ||2-1||
संजय ने कहा: जो व्यक्ति करुणा से आविष्ट था और जो विषादग्रस्त था, जिसकी आँखें आँसुओं से भरी और व्यथित थीं, उसे मधुसूदन (मधु का संहारक) या कृष्ण ने ये शब्द कहे।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी सिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत

2.1 तम् उसे, तथा इस प्रकार, कृपया करुणा से, आविष्टम् आविष्ट, अश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् आँसुओं से भरी और व्यथित आँखें, विषीदन्तम् विषादग्रस्त, इदम् यह, वाक्यम् वचन, उवाच बोला, मधुसूदनः मधुसूदन। कोई टिप्पणी नहीं।

इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें

यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।

हमारे साथ चलें

एक पाठ, एक प्रश्न, हर रविवार। और कुछ नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी