हे अर्जुन, तुम्हारे अपने स्वभाव से उत्पन्न कर्म से बँधे हुए हो, जिस काम को तुम मोह के कारण नहीं करना चाहते हो, उसे भी तुम विवश होकर करोगे।
हिंदी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
18.60 स्वभावजेन अपने स्वभाव से उत्पन्न? कौन्तेय कुंती के पुत्र? निबद्धः बँधे हुए? स्वेन अपने? कर्मणा कर्म से? कर्तुम् करने के लिए? न नहीं? इच्छसि चाहते हो? यत् जो? मोहात् मोह से? करिष्यसि करोगे? अवशः विवश? अपि भी? तत् वह।व्याख्या हे अर्जुन, तुम योद्धा के गुणों, पराक्रम, शूरता, कुशलता आदि से संपन्न हो। इसलिए तुम अपने इन्हीं जन्मजात गुणों से बँधे हुए हो। तुम अपने स्वभाव द्वारा लड़ने के लिए बाध्य होगे। प्रकृति तुम्हें बहुत हद तक अपनी इच्छा के विरुद्ध लड़ने के लिए विवश करेगी।
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18.60 स्वभावजेन अपने स्वभाव से उत्पन्न? कौन्तेय कुंती के पुत्र? निबद्धः बँधे हुए? स्वेन अपने? कर्मणा कर्म से? कर्तुम् करने के लिए? न नहीं? इच्छसि चाहते हो? यत् जो? मोहात् मोह से? करिष्यसि करोगे? अवशः विवश? अपि भी? तत् वह।व्याख्या हे अर्जुन, तुम योद्धा के गुणों, पराक्रम, शूरता, कुशलता आदि से संपन्न हो। इसलिए तुम अपने इन्हीं जन्मजात गुणों से बँधे हुए हो। तुम अपने स्वभाव द्वारा लड़ने के लिए बाध्य होगे। प्रकृति तुम्हें बहुत हद तक अपनी इच्छा के विरुद्ध लड़ने के लिए विवश करेगी।