यदि तुम अहंकार में फंसकर सोचते हो कि "मैं युद्ध नहीं करूंगा", तो यह तुम्हारा संकल्प व्यर्थ है; प्रकृति तुम्हें बाध्य करेगी।
हिंदी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
18.59 यत् यदि? अहङ्कारम् अहंकार? आश्रित्य शरण में लेकर? न नहीं? योत्स्ये युद्ध करूंगा? इति ऐसा? मन्यसे सोचते हो? मिथ्या व्यर्थ? एषः यह? व्यवसायः संकल्प? ते तुम्हारा? प्रकृतिः प्रकृति? त्वाम् तुम्हें? नियोक्ष्यति बाध्य करेगी।टिप्पणी तुम्हारे मन का यह दृढ़ संकल्प तुम्हारी आंतरिक प्रकृति द्वारा पूरी तरह विफल कर दिया जाएगा। तुम्हारी प्रकृति क्षत्रिय के रूप में तुम्हें युद्ध के लिए बाध्य करेगी। यह कहना एक मात्र भ्रम है कि तुम अर्जुन हो, कि ये तुम्हारे रिश्तेदार हैं और उन्हें मारना पाप होगा।
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यह श्लोक आपके अंदर क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।
18.59 यत् यदि? अहङ्कारम् अहंकार? आश्रित्य शरण में लेकर? न नहीं? योत्स्ये युद्ध करूंगा? इति ऐसा? मन्यसे सोचते हो? मिथ्या व्यर्थ? एषः यह? व्यवसायः संकल्प? ते तुम्हारा? प्रकृतिः प्रकृति? त्वाम् तुम्हें? नियोक्ष्यति बाध्य करेगी।टिप्पणी तुम्हारे मन का यह दृढ़ संकल्प तुम्हारी आंतरिक प्रकृति द्वारा पूरी तरह विफल कर दिया जाएगा। तुम्हारी प्रकृति क्षत्रिय के रूप में तुम्हें युद्ध के लिए बाध्य करेगी। यह कहना एक मात्र भ्रम है कि तुम अर्जुन हो, कि ये तुम्हारे रिश्तेदार हैं और उन्हें मारना पाप होगा।