बुद्धि और धृति के इस त्रिविध विभाजन को सुनो जो गुणों के अनुसार है, जिसे मैं पूर्ण और स्पष्ट रूप से बताता हूँ, हे अर्जुन।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
18.29 बुद्धेः बुद्धि की? भेदम् विभाजन? धृतेः धृति की? च और? एव भी? गुणतः गुणों के अनुसार? त्रिविधम् त्रिविध? श्रृणु सुनो? प्रोच्यमानम् जैसा मैं बताता हूँ? अशेषेण पूर्ण रूप से? पृथक्त्वेन स्पष्ट रूप से? धनञ्जय हे धनंजय। टिप्पणी धनञ्जय धनंजय - अर्जुन को यह नाम इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने पृथ्वी के चारों दिशाओं में विजय यात्रा (दिग्विजय) के दौरान बहुत सामग्री और आध्यात्मिक संपत्ति प्राप्त की थी।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से सीखते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।
18.29 बुद्धेः बुद्धि की? भेदम् विभाजन? धृतेः धृति की? च और? एव भी? गुणतः गुणों के अनुसार? त्रिविधम् त्रिविध? श्रृणु सुनो? प्रोच्यमानम् जैसा मैं बताता हूँ? अशेषेण पूर्ण रूप से? पृथक्त्वेन स्पष्ट रूप से? धनञ्जय हे धनंजय। टिप्पणी धनञ्जय धनंजय - अर्जुन को यह नाम इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने पृथ्वी के चारों दिशाओं में विजय यात्रा (दिग्विजय) के दौरान बहुत सामग्री और आध्यात्मिक संपत्ति प्राप्त की थी।