वह तपस्या जो मूर्खतापूर्ण विचार के साथ, आत्म-यातना के साथ, या किसी दूसरे को नष्ट करने के उद्देश्य से की जाती है, तामसिक घोषित की जाती है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
17.19 मूढग्राहेण मूर्खतापूर्ण विचार से? आत्मनः आत्मा का? यत् जो? पीडया यातना के साथ? क्रियते की जाती है? तपः तपस्या? परस्य दूसरे की? उत्सादनार्थम् नष्ट करने के उद्देश्य से? वा या? तत् वह? तामसम् तामसिक? उदाहृतम् घोषित की जाती है।टिप्पणी कुछ लोग एक बर्तन में गंधक जलाते हैं और इसे अपने सिर पर रखते हैं। कुछ अपने मांस में लोहे के कांटे डालते हैं। कुछ लोग अपने सिर को आग के ऊपर उल्टा लटकाते हैं और धुआँ निगलते हैं। कुछ ठंडे पानी में गर्दन तक डूबे हुए खड़े रहते हैं। कुछ चारों ओर आग लगाकर शरीर को यातना देते हैं (सूर्य को पाँचवीं आग माना जाता है -- इसे पंचाग्नि तपस्या कहा जाता है)। कुछ आग के बीच में बैठते हैं। ऐसी तपस्याएँ तामसिक हैं। ये आत्म ज्ञान प्राप्त करने में मदद नहीं देंगी।
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17.19 मूढग्राहेण मूर्खतापूर्ण विचार से? आत्मनः आत्मा का? यत् जो? पीडया यातना के साथ? क्रियते की जाती है? तपः तपस्या? परस्य दूसरे की? उत्सादनार्थम् नष्ट करने के उद्देश्य से? वा या? तत् वह? तामसम् तामसिक? उदाहृतम् घोषित की जाती है।टिप्पणी कुछ लोग एक बर्तन में गंधक जलाते हैं और इसे अपने सिर पर रखते हैं। कुछ अपने मांस में लोहे के कांटे डालते हैं। कुछ लोग अपने सिर को आग के ऊपर उल्टा लटकाते हैं और धुआँ निगलते हैं। कुछ ठंडे पानी में गर्दन तक डूबे हुए खड़े रहते हैं। कुछ चारों ओर आग लगाकर शरीर को यातना देते हैं (सूर्य को पाँचवीं आग माना जाता है -- इसे पंचाग्नि तपस्या कहा जाता है)। कुछ आग के बीच में बैठते हैं। ऐसी तपस्याएँ तामसिक हैं। ये आत्म ज्ञान प्राप्त करने में मदद नहीं देंगी।