मन की शांति, सद्भावना, आत्मनियंत्रण, प्रकृति की पवित्रता — इसे मानसिक तप कहा जाता है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
17.16 मनःप्रसादः मन की शांति? सौम्यत्वम् सद्भावना? मौनम् मौन? आत्मविनिग्रहः आत्मनियंत्रण? भावसंशुद्धिः प्रकृति की पवित्रता? इति इस प्रकार? एतत् यह? तपः तप? मानसम् मानसिक? उच्यते कहा जाता है।टिप्पणी जिस प्रकार एक झील जिसकी सतह पर लहर नहीं है, बहुत शांत है, उसी प्रकार मन जो संशोधनों से, संवेदनशील वस्तुओं के भटकाव से मुक्त है, शांत और प्रशांत है।Saumyatvam सभी प्राणियों के कल्याण के लिए इरादा, वह मन की अवस्था जो इसके प्रभावों से अनुमान लगाई जा सकती है, जैसे चेहरे की चमक आदि।Maunam बोली की मौनता आवश्यक रूप से विचार पर नियंत्रण से पहले होती है, और इसलिए प्रभाव यहाँ कारण के लिए खड़ा है, अर्थात्, विचार पर नियंत्रण, यह बोली के संबंध में विचार पर नियंत्रण का परिणाम है, मन की मौनता, बाहर के व्यथित कारकों के बीच भी शांत रहने की क्षमता। Mauna मुनि (ऋषि) की अवस्था है, अर्थात्, एकाग्रता के साथ ध्यान का अभ्यास।Atmavinigrahah आत्मनियंत्रण मन का सामान्य नियंत्रण। Asamprajnata Samadhi जिसमें मन के सभी संशोधन नियंत्रित हैं। मन इंद्रियों के पीछे नहीं दौड़ सकता और इंद्रियां अपनी वस्तुओं के पीछे नहीं दौड़ सकती। मौन में बोली के संबंध में विचार पर नियंत्रण होता है।Bhavasamsuddhih प्रकृति की पवित्रता — उद्देश्य की ईमानदारी, लोगों के साथ व्यवहार में चालाकी से मुक्ति, मन की शुद्ध अवस्था जिसमें वासना, क्रोध, लालच आदि की अनुपस्थिति है।
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17.16 मनःप्रसादः मन की शांति? सौम्यत्वम् सद्भावना? मौनम् मौन? आत्मविनिग्रहः आत्मनियंत्रण? भावसंशुद्धिः प्रकृति की पवित्रता? इति इस प्रकार? एतत् यह? तपः तप? मानसम् मानसिक? उच्यते कहा जाता है।टिप्पणी जिस प्रकार एक झील जिसकी सतह पर लहर नहीं है, बहुत शांत है, उसी प्रकार मन जो संशोधनों से, संवेदनशील वस्तुओं के भटकाव से मुक्त है, शांत और प्रशांत है।Saumyatvam सभी प्राणियों के कल्याण के लिए इरादा, वह मन की अवस्था जो इसके प्रभावों से अनुमान लगाई जा सकती है, जैसे चेहरे की चमक आदि।Maunam बोली की मौनता आवश्यक रूप से विचार पर नियंत्रण से पहले होती है, और इसलिए प्रभाव यहाँ कारण के लिए खड़ा है, अर्थात्, विचार पर नियंत्रण, यह बोली के संबंध में विचार पर नियंत्रण का परिणाम है, मन की मौनता, बाहर के व्यथित कारकों के बीच भी शांत रहने की क्षमता। Mauna मुनि (ऋषि) की अवस्था है, अर्थात्, एकाग्रता के साथ ध्यान का अभ्यास।Atmavinigrahah आत्मनियंत्रण मन का सामान्य नियंत्रण। Asamprajnata Samadhi जिसमें मन के सभी संशोधन नियंत्रित हैं। मन इंद्रियों के पीछे नहीं दौड़ सकता और इंद्रियां अपनी वस्तुओं के पीछे नहीं दौड़ सकती। मौन में बोली के संबंध में विचार पर नियंत्रण होता है।Bhavasamsuddhih प्रकृति की पवित्रता — उद्देश्य की ईमानदारी, लोगों के साथ व्यवहार में चालाकी से मुक्ति, मन की शुद्ध अवस्था जिसमें वासना, क्रोध, लालच आदि की अनुपस्थिति है।