जो मनुष्य इन तीन अंधकार के द्वारों से मुक्त हो जाता है, हे अर्जुन, वह अपने लिए अच्छे कार्यों का आचरण करता है और इस प्रकार परम लक्ष्य को प्राप्त होता है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
16.22 एतैः इन से? विमुक्तः मुक्त? कौन्तेय हे कौन्तेय? तमोद्वारैः अंधकार के द्वारों से? त्रिभिः (तीनों) से? नरः मनुष्य? आचरति आचरण करता है? आत्मनः अपने लिए? श्रेयः कल्याणकारी? ततः और फिर? याति जाता है? पराम् परम? गतिम् लक्ष्य को।टिप्पणी जब इन नरक के द्वारों का परित्याग कर दिया जाता है, तो साधक के लिए मुक्ति का मार्ग स्पष्ट हो जाता है। उसे ऋषियों की संगति मिलती है, जो मुक्ति की ओर ले जाती है। उसे आध्यात्मिक निर्देश मिलते हैं और वह उन का पालन करता है। वह शास्त्रों को सुनता है, चिंतन करता है, ध्यान करता है और आत्मज्ञान प्राप्त करता है।तमोद्वार अंधकार का द्वार जो नरक की ओर ले जाता है जो पीड़ा और भ्रम से भरा होता है।
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16.22 एतैः इन से? विमुक्तः मुक्त? कौन्तेय हे कौन्तेय? तमोद्वारैः अंधकार के द्वारों से? त्रिभिः (तीनों) से? नरः मनुष्य? आचरति आचरण करता है? आत्मनः अपने लिए? श्रेयः कल्याणकारी? ततः और फिर? याति जाता है? पराम् परम? गतिम् लक्ष्य को।टिप्पणी जब इन नरक के द्वारों का परित्याग कर दिया जाता है, तो साधक के लिए मुक्ति का मार्ग स्पष्ट हो जाता है। उसे ऋषियों की संगति मिलती है, जो मुक्ति की ओर ले जाती है। उसे आध्यात्मिक निर्देश मिलते हैं और वह उन का पालन करता है। वह शास्त्रों को सुनता है, चिंतन करता है, ध्यान करता है और आत्मज्ञान प्राप्त करता है।तमोद्वार अंधकार का द्वार जो नरक की ओर ले जाता है जो पीड़ा और भ्रम से भरा होता है।