सत्त्व सुख से जुड़ता है, राज कर्म से जुड़ता है, हे अर्जुन, जबकि तम ज्ञान को ढके हुए वास्तव में प्रमाद से जुड़ता है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
14.9 सत्त्वम् शुद्धता? सुखे सुख से? सञ्जयति जुड़ता है? रजः सक्रिय बल? कर्मणि कर्म से? भारत हे भारत? ज्ञानम् ज्ञान? आवृत्य ढके हुए? तु वास्तव में? तमः जड़ता? प्रमादे प्रमाद से? सञ्जयति जुड़ता है? उत परंतु।टिप्पणी जैसे काला बादल सूर्य को ढके हुए है, उसी तरह तम ज्ञान या आत्म के प्रकाश को घेरे हुए है। तम प्रमाद के लिए आसक्ति बनाता है, अर्थात्, ज्ञानहीनता या कर्तव्य की विस्मृति या आवश्यक (अनिवार्य) कर्तव्यों का न करना।
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यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से आकर्षण लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।
14.9 सत्त्वम् शुद्धता? सुखे सुख से? सञ्जयति जुड़ता है? रजः सक्रिय बल? कर्मणि कर्म से? भारत हे भारत? ज्ञानम् ज्ञान? आवृत्य ढके हुए? तु वास्तव में? तमः जड़ता? प्रमादे प्रमाद से? सञ्जयति जुड़ता है? उत परंतु।टिप्पणी जैसे काला बादल सूर्य को ढके हुए है, उसी तरह तम ज्ञान या आत्म के प्रकाश को घेरे हुए है। तम प्रमाद के लिए आसक्ति बनाता है, अर्थात्, ज्ञानहीनता या कर्तव्य की विस्मृति या आवश्यक (अनिवार्य) कर्तव्यों का न करना।