हे अर्जुन, जो भी रूप किसी भी योनि में उत्पन्न होते हैं, उन सभी का महान् ब्रह्म (प्रकृति) योनि है और मैं बीज देने वाला पिता हूँ।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत
14.4 सर्वयोनिषु सभी योनियों में? कौन्तेय कुंती के पुत्र (अर्जुन)? मूर्तयः रूप? सम्भवन्ति उत्पन्न होते हैं? याः जो? तासाम् उनके? ब्रह्म ब्रह्म (प्रकृति)? महत् महान्? योनिः योनि? अहम् मैं? बीजप्रदः बीज देने वाला? पिता पिता। टिप्पणी मैं पिता हूँ प्रकृति माता है। संपूर्ण प्रकट विश्व बालक है जिसे प्रकृति ने मेरे साथ संबंध में उत्पन्न किया है। इसलिए मुझे इस दुनिया का पिता कहा जाता है। योनियाँ जैसे देवता, पितर, मनुष्य, पशु, वन्यजीव, पक्षी आदि। रूप शरीर जिनमें अंग, भाग, आंगिक आदि होते हैं।
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यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ज्ञान लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।
14.4 सर्वयोनिषु सभी योनियों में? कौन्तेय कुंती के पुत्र (अर्जुन)? मूर्तयः रूप? सम्भवन्ति उत्पन्न होते हैं? याः जो? तासाम् उनके? ब्रह्म ब्रह्म (प्रकृति)? महत् महान्? योनिः योनि? अहम् मैं? बीजप्रदः बीज देने वाला? पिता पिता। टिप्पणी मैं पिता हूँ प्रकृति माता है। संपूर्ण प्रकट विश्व बालक है जिसे प्रकृति ने मेरे साथ संबंध में उत्पन्न किया है। इसलिए मुझे इस दुनिया का पिता कहा जाता है। योनियाँ जैसे देवता, पितर, मनुष्य, पशु, वन्यजीव, पक्षी आदि। रूप शरीर जिनमें अंग, भाग, आंगिक आदि होते हैं।