जैसे एक सूर्य संपूर्ण विश्व को प्रकाशित करता है, वैसे ही क्षेत्र का स्वामी (परमात्मा)
संपूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करता है, हे अर्जुन।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
13.34 यथा जैसे? प्रकाशयति प्रकाशित करता है? एकः एक? कृत्स्नम् संपूर्ण? लोकम् संसार? इमम् यह? रविः सूर्य? क्षेत्रम् क्षेत्र? क्षेत्री क्षेत्र का स्वामी (परमात्मा)? तथा वैसे ही? कृत्स्नम् संपूर्ण? प्रकाशयति प्रकाशित करता है? भारत हे भरत के वंशज (अर्जुन)।व्याख्या परमात्मा एक है। वह अव्यक्त से लेकर घास के तिनके या मिट्टी के ढेर तक संपूर्ण पदार्थ को प्रकाशित करता है? महान तत्वों से लेकर दृढ़ता या साहस तक। (देखें श्लोक 5 और 6।) जैसे सूर्य एक है? जैसे सूर्य संपूर्ण विश्व को प्रकाशित करता है? जैसे सूर्य दागी नहीं होता? वैसे ही आत्मा सभी शरीरों में एक है? वह सभी शरीरों को प्रकाशित करता है और वह प्रदूषित नहीं होता।
इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें
यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेता है और आपके अपने पथ को सम्मानित करता है।
13.34 यथा जैसे? प्रकाशयति प्रकाशित करता है? एकः एक? कृत्स्नम् संपूर्ण? लोकम् संसार? इमम् यह? रविः सूर्य? क्षेत्रम् क्षेत्र? क्षेत्री क्षेत्र का स्वामी (परमात्मा)? तथा वैसे ही? कृत्स्नम् संपूर्ण? प्रकाशयति प्रकाशित करता है? भारत हे भरत के वंशज (अर्जुन)।व्याख्या परमात्मा एक है। वह अव्यक्त से लेकर घास के तिनके या मिट्टी के ढेर तक संपूर्ण पदार्थ को प्रकाशित करता है? महान तत्वों से लेकर दृढ़ता या साहस तक। (देखें श्लोक 5 और 6।) जैसे सूर्य एक है? जैसे सूर्य संपूर्ण विश्व को प्रकाशित करता है? जैसे सूर्य दागी नहीं होता? वैसे ही आत्मा सभी शरीरों में एक है? वह सभी शरीरों को प्रकाशित करता है और वह प्रदूषित नहीं होता।