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भगवद्गीता 12.8

मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय | निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ||१२-८||
mayyeva mana ādhatsva mayi buddhiṃ niveśaya . nivasiṣyasi mayyeva ata ūrdhvaṃ na saṃśayaḥ ||12-8||
अपना मन मेरे में ही लगाओ, अपनी बुद्धि मेरे में स्थिर करो, तब तुम केवल मेरे में ही निवास करोगे, इसमें कोई संदेह नहीं।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत

12.8 मयि मुझमें? एव केवल? मनः मन? आधत्स्व स्थिर करो? मयि मुझमें? बुद्धिम् (तुम्हारी) बुद्धि? निवेशय रखो? निवसिष्यसि तुम रहोगे? मयि मुझमें? एव केवल? अतः ऊर्ध्वम् इसके बाद? न नहीं? संशयः संदेह।टिप्पणी अपना मन स्थिर करो का अर्थ है कि तुम्हारे उद्देश्य और विचार प्रभु में, जो कॉस्मिक रूप में हैं, लगाओ। इंद्रियों की वस्तुओं के सभी विचारों को पूरी तरह त्याग दो। अपनी बुद्धि भी मुझमें स्थिर करो -- वह शक्ति जो निश्चय करती और निर्धारण करती है।तब क्या परिणाम होगा? हे अर्जुन, तुम निःसंदेह मुझमें ही मेरे समान रहोगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।ध्यान का योग इस श्लोक में वर्णित है। (तुलना करें VIII.7, X.9, XI.34, XVIII.65)

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