जिन लोगों का मन मुझ पर स्थित है, हे अर्जुन, मैं शीघ्र ही उन्हें संसार के महासागर से मुक्त करने वाला बन जाता हूँ।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्द के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
12.7 तेषाम् उनके लिए? अहम् मैं? समुद्धर्ता उद्धारकर्ता? मृत्युसंसारसागरात् मृत्यु-संसार के महासागर से? भवामि (मैं) बन जाता हूँ? नचिरात् शीघ्र ही? पार्थ हे अर्जुन? मयि मुझ में? आवेशितचेतसाम् जिनका मन स्थित है।व्याख्या मृत्यु-संसार जन्म और मृत्यु का चक्र। वह भक्त जो प्रभु के प्रति पूर्ण? निरपेक्ष और निस्वार्थ आत्मसमर्पण करता है? जो स्वयं को पूरी तरह प्रभु की कृपा पर छोड़ देता है? और जो कर्मों को प्रभु को अर्पित करके उनके फलों की शक्ति को नष्ट कर देता है? और जिसने मुक्ति का विचार भी छोड़ दिया है? शीघ्र ही प्रभु द्वारा उठाया जाता है? मृत्यु लोक से अमरता के धाम तक। मैं उन लोगों को छुड़ाता हूँ जो मच्चित्त अर्थात् मन से मेरे साथ एकीभूत हो गए हैं? संसार के महासागर से? बिना देरी के। (cf.X.10.11XII.6और7)
इस श्लोक पर Ananda के साथ विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से लाभ लेता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।
12.7 तेषाम् उनके लिए? अहम् मैं? समुद्धर्ता उद्धारकर्ता? मृत्युसंसारसागरात् मृत्यु-संसार के महासागर से? भवामि (मैं) बन जाता हूँ? नचिरात् शीघ्र ही? पार्थ हे अर्जुन? मयि मुझ में? आवेशितचेतसाम् जिनका मन स्थित है।व्याख्या मृत्यु-संसार जन्म और मृत्यु का चक्र। वह भक्त जो प्रभु के प्रति पूर्ण? निरपेक्ष और निस्वार्थ आत्मसमर्पण करता है? जो स्वयं को पूरी तरह प्रभु की कृपा पर छोड़ देता है? और जो कर्मों को प्रभु को अर्पित करके उनके फलों की शक्ति को नष्ट कर देता है? और जिसने मुक्ति का विचार भी छोड़ दिया है? शीघ्र ही प्रभु द्वारा उठाया जाता है? मृत्यु लोक से अमरता के धाम तक। मैं उन लोगों को छुड़ाता हूँ जो मच्चित्त अर्थात् मन से मेरे साथ एकीभूत हो गए हैं? संसार के महासागर से? बिना देरी के। (cf.X.10.11XII.6और7)