न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानैर्-
न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः |
एवंरूपः शक्य अहं नृलोके
द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर ||११-४८||
na vedayajñādhyayanairna dānaira- na ca kriyābhirna tapobhirugraiḥ .
evaṃrūpaḥ śakya ahaṃ nṛloke draṣṭuṃ tvadanyena kurupravīra ||11-48||
न वेद और यज्ञों के अध्ययन से, न ही दान से, न ही कर्मकाण्ड से और न ही कठोर तपस्या से मैं इस रूप में मनुष्यों के लोक में तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य के द्वारा देखा जा सकता हूँ, हे कुरुवीर अर्जुन।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दार्थ वही स्रोत हैं। स्रोत
11.48 न नहीं? वेदयज्ञाध्ययनैः वेदों और यज्ञों के अध्ययन से? न नहीं? दानैः दान से? न नहीं? च और? क्रियाभिः कर्मकाण्ड से? न नहीं? तपोभिः तपस्या से? उग्रैः कठोर? एवंरूपः इस रूप में? शक्यः संभव है? अहम् मैं? नृलोके मनुष्यों के लोक में? द्रष्टुम् देखा जाना? त्वत् तुमसे? अन्येन किसी अन्य के द्वारा? कुरुप्रवीर हे कुरुवीर। व्याख्या वेदों के सिर्फ रटे-रटाए पाठ बिना अर्थ समझे काम नहीं आते। यज्ञों के अध्ययन की भी आवश्यकता है। इनके अर्थ को भी जानना चाहिए। दान तुलापुरुष दान (किसी व्यक्ति के वजन के बराबर सोना), कन्यादान (विवाह में पुत्री का दान), गाय का दान, चावल आदि का दान। कर्मकाण्ड अग्निहोत्र जैसे कर्मकाण्ड। तपस्या चंद्रायण व्रत जैसी तपस्या।
इस श्लोक पर आनंद के साथ ध्यान करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग को सम्मान देते हैं।
11.48 न नहीं? वेदयज्ञाध्ययनैः वेदों और यज्ञों के अध्ययन से? न नहीं? दानैः दान से? न नहीं? च और? क्रियाभिः कर्मकाण्ड से? न नहीं? तपोभिः तपस्या से? उग्रैः कठोर? एवंरूपः इस रूप में? शक्यः संभव है? अहम् मैं? नृलोके मनुष्यों के लोक में? द्रष्टुम् देखा जाना? त्वत् तुमसे? अन्येन किसी अन्य के द्वारा? कुरुप्रवीर हे कुरुवीर। व्याख्या वेदों के सिर्फ रटे-रटाए पाठ बिना अर्थ समझे काम नहीं आते। यज्ञों के अध्ययन की भी आवश्यकता है। इनके अर्थ को भी जानना चाहिए। दान तुलापुरुष दान (किसी व्यक्ति के वजन के बराबर सोना), कन्यादान (विवाह में पुत्री का दान), गाय का दान, चावल आदि का दान। कर्मकाण्ड अग्निहोत्र जैसे कर्मकाण्ड। तपस्या चंद्रायण व्रत जैसी तपस्या।