इसलिए, नमस्कार करते हुए, अपने शरीर को झुकाते हुए, मैं आपकी क्षमा चाहता हूँ, हे पूजनीय भगवान्। जैसे पिता अपने पुत्र को, मित्र अपने (प्रिय) मित्र को, प्रेमी अपनी प्रिया को क्षमा करते हैं, वैसे ही आप मुझे क्षमा कर सकते हैं, हे देव।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
11.44 तस्मात् इसलिए? प्रणम्य नमस्कार करते हुए? प्रणिधाय झुकाते हुए? कायम् शरीर? प्रसादये क्षमा चाहता हूँ? त्वाम् आपको? अहम् मैं? ईशम् भगवान्? ईड्यम् पूजनीय? पिता पिता? प्रियः प्रिय? प्रियायाः प्रिया के लिए? अर्हसि (आप) कर सकते हैं? देव हे देव? सोढुम् सहन करना।टिप्पणी हे भगवान्, मुझे अपने आलिंगन में लें जैसे माता अपने बालक को लेती है। मुझे उन सभी के लिए क्षमा करें जो मैंने अब तक कहा या किया है। मेरे दोषों को क्षमा करें। कृपया मेरी पिछली गलतियों को नज़रअंदाज़ करें। मैंने यह अज्ञान के कारण किया है। अब मैं विनम्रता के साथ आपके पास आया हूँ। मैं अब आपसे क्षमा की भিक्षा माँगता हूँ।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने मार्ग का सम्मान करते हैं।
11.44 तस्मात् इसलिए? प्रणम्य नमस्कार करते हुए? प्रणिधाय झुकाते हुए? कायम् शरीर? प्रसादये क्षमा चाहता हूँ? त्वाम् आपको? अहम् मैं? ईशम् भगवान्? ईड्यम् पूजनीय? पिता पिता? प्रियः प्रिय? प्रियायाः प्रिया के लिए? अर्हसि (आप) कर सकते हैं? देव हे देव? सोढुम् सहन करना।टिप्पणी हे भगवान्, मुझे अपने आलिंगन में लें जैसे माता अपने बालक को लेती है। मुझे उन सभी के लिए क्षमा करें जो मैंने अब तक कहा या किया है। मेरे दोषों को क्षमा करें। कृपया मेरी पिछली गलतियों को नज़रअंदाज़ करें। मैंने यह अज्ञान के कारण किया है। अब मैं विनम्रता के साथ आपके पास आया हूँ। मैं अब आपसे क्षमा की भিक्षा माँगता हूँ।