और जो कुछ भी सभी प्राणियों का बीज है, वह भी मैं हूँ, हे अर्जुन; कोई भी प्राणी, चाहे गतिशील हो या स्थिर, मेरे बिना अस्तित्व में नहीं रह सकता।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
10.39 यत् कौन? च और? अपि भी? सर्वभूतानाम् सभी प्राणियों में? बीजम् बीज? तत् वह? अहम् मैं? अर्जुन हे अर्जुन? न नहीं? तत् वह? अस्ति है? विना बिना? यत् जो? स्यात् हो सकता है? मया मेरे द्वारा? भूतम् प्राणी? चराचरम् गतिशील या स्थिर।टिप्पणी मैं वह आदिम बीज हूँ जिससे समस्त सृष्टि का प्राकट्य हुआ है। मैं सभी चीजों का बीज हूँ। मैं सभी चीजों का आत्मा हूँ। मेरे बिना कुछ भी अस्तित्व में नहीं रह सकता। सभी चीजें मेरे स्वभाव की हैं। मैं सभी चीजों का सार हूँ। मेरे बिना सभी चीजें शून्य मात्र होतीं। मैं सभी चीजों की आत्मा हूँ।
इस श्लोक पर Ananda के साथ विचार करें
यह श्लोक आपके मन में क्या उभारता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से प्रेरणा लेता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।
10.39 यत् कौन? च और? अपि भी? सर्वभूतानाम् सभी प्राणियों में? बीजम् बीज? तत् वह? अहम् मैं? अर्जुन हे अर्जुन? न नहीं? तत् वह? अस्ति है? विना बिना? यत् जो? स्यात् हो सकता है? मया मेरे द्वारा? भूतम् प्राणी? चराचरम् गतिशील या स्थिर।टिप्पणी मैं वह आदिम बीज हूँ जिससे समस्त सृष्टि का प्राकट्य हुआ है। मैं सभी चीजों का बीज हूँ। मैं सभी चीजों का आत्मा हूँ। मेरे बिना कुछ भी अस्तित्व में नहीं रह सकता। सभी चीजें मेरे स्वभाव की हैं। मैं सभी चीजों का सार हूँ। मेरे बिना सभी चीजें शून्य मात्र होतीं। मैं सभी चीजों की आत्मा हूँ।