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भगवद् गीता 10.35

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् | मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ||१०-३५||
bṛhatsāma tathā sāmnāṃ gāyatrī chandasāmaham . māsānāṃ mārgaśīrṣo.ahamṛtūnāṃ kusumākaraḥ ||10-35||
स्तोत्रों में भी मैं बृहत्साम हूँ; मीटरों में गायत्री हूँ; महीनों में मार्गशीर्ष हूँ; ऋतुओं में (मैं) फूलों की ऋतु हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत

10.35 बृहत्साम बृहत्साम? तथा भी? साम्नाम् साम स्तोत्रों में? गायत्री गायत्री? छन्दसाम् मीटरों में? अहम् मैं? मासानाम् महीनों में? मार्गशीर्षः मार्गशीर्ष? अहम् मैं? ऋतूनाम् ऋतुओं में? कुसुमाकरः फूलों की ऋतु (वसंत)।टिप्पणी बृहत्साम सामवेद के स्तोत्रों का मुखिया है। बृहत् का अर्थ है बड़ा।मार्गशीर्ष दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक। इस का जलवायु समशीतोष्ण है। पुरानी परंपरा में साल के महीनों की गणना शुरू करते समय इसी महीने को शुरुआत माना जाता था। इस महीने को सर्वोच्च स्थान दिया जाता था।कुसुमाकर सुंदर फूलों की ऋतु? वसंत।

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यह श्लोक आपके मन में क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से निकालते हैं और आपके अपने पथ को सम्मान देते हैं।

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