और मैं दैत्यों में प्रह्लाद हूँ, गणकों में मैं काल हूँ; पशुओं में मैं सिंह हूँ, और पक्षियों में वैनतेय (गरुड़) हूँ।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
10.30 प्रह्लादः प्रह्लाद? च और? अस्मि (मैं) हूँ? दैत्यानाम् दैत्यों में? कालः काल? कलयताम् गणकों में? अहम् मैं? मृगाणाम् पशुओं में? च और? मृगेन्द्रः सिंह? अहम् मैं? वैनतेयः विनता के पुत्र (गरुड़)? च और? पक्षिणाम् पक्षियों में।व्याख्या प्रह्लाद? हालांकि वह एक राक्षस (हिरण्यकश्यप) का पुत्र था? प्रभु का एक महान भक्त था।
इस श्लोक पर आनंद के साथ विचार करें
यह श्लोक आपमें क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से लेते हैं और आपके अपने पथ का सम्मान करते हैं।
10.30 प्रह्लादः प्रह्लाद? च और? अस्मि (मैं) हूँ? दैत्यानाम् दैत्यों में? कालः काल? कलयताम् गणकों में? अहम् मैं? मृगाणाम् पशुओं में? च और? मृगेन्द्रः सिंह? अहम् मैं? वैनतेयः विनता के पुत्र (गरुड़)? च और? पक्षिणाम् पक्षियों में।व्याख्या प्रह्लाद? हालांकि वह एक राक्षस (हिरण्यकश्यप) का पुत्र था? प्रभु का एक महान भक्त था।