सभी वृक्षों में (मैं) पीपल हूँ; देवऋषियों में, मैं नारद हूँ; गंधर्वों में, चित्ररथ हूँ; सिद्धों में, ऋषि कपिल हूँ।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्द अर्थ उसी स्रोत से हैं। स्रोत
10.26 अश्वत्थः पीपल? सर्ववृक्षाणाम् सभी वृक्षों में? देवर्षीणाम् देवऋषियों में? च और? नारदः नारद? गन्धर्वाणाम् गंधर्वों में? चित्ररथः चित्ररथ? सिद्धानाम् सिद्धों में या संपूर्ण? कपिलः कपिल? मुनिः ऋषि। व्याख्या देवर्षि देवता और साथ ही मंत्रों के दर्शी ऋषि होते हैं। सिद्ध वे संपूर्ण लोग होते हैं जो अपने जन्म के समय ही बिना किसी प्रयास के धर्म (पुण्य)? ज्ञान (आत्म-ज्ञान)? वैराग्य (अनासक्ति) और ऐश्वर्य (प्रभुत्व) को प्राप्त करते हैं। मुनि वह है जो मनन (चिंतन) करता है या जो ध्यान करता है।
इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें
यह श्लोक आपके मन में क्या जगाता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से खींचता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।
10.26 अश्वत्थः पीपल? सर्ववृक्षाणाम् सभी वृक्षों में? देवर्षीणाम् देवऋषियों में? च और? नारदः नारद? गन्धर्वाणाम् गंधर्वों में? चित्ररथः चित्ररथ? सिद्धानाम् सिद्धों में या संपूर्ण? कपिलः कपिल? मुनिः ऋषि। व्याख्या देवर्षि देवता और साथ ही मंत्रों के दर्शी ऋषि होते हैं। सिद्ध वे संपूर्ण लोग होते हैं जो अपने जन्म के समय ही बिना किसी प्रयास के धर्म (पुण्य)? ज्ञान (आत्म-ज्ञान)? वैराग्य (अनासक्ति) और ऐश्वर्य (प्रभुत्व) को प्राप्त करते हैं। मुनि वह है जो मनन (चिंतन) करता है या जो ध्यान करता है।