बेहतर अनुभव के लिए One Source Sangha इंस्टॉल करें

भगवद् गीता 10.20

अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः | अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ||१०-२०||
ahamātmā guḍākeśa sarvabhūtāśayasthitaḥ . ahamādiśca madhyaṃ ca bhūtānāmanta eva ca ||10-20||
हे गुडाकेश, मैं आत्मा हूँ जो सभी प्राणियों के हृदय में स्थित है; मैं सभी प्राणियों का आदि, मध्य और अंत हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत

10.20 अहम् मैं? आत्मा आत्मा? गुडाकेश हे गुडाकेश? सर्वभूताशयस्थितः सभी प्राणियों के हृदय में स्थित? अहम् मैं? आदिः आदि? च और? मध्यम् मध्य? च और? भूतानाम् (सभी) प्राणियों का? अन्तः अंत? एव ही? च और।व्याख्या हे गुडाकेश, मैं वह आत्मा (प्रत्यगात्मा) हूँ जो सभी प्राणियों के हृदय में विद्यमान है और मैं सभी सृष्ट प्राणियों का स्रोत या उद्भव, मध्य या स्थिति और अंत भी हूँ। मैं सभी प्राणियों का जन्म, जीवन और मृत्यु हूँ। मुझ पर अद्वैत भाव से ध्यान करो - आत्मरूप से।गुडाकेश का अर्थ है नींद का विजेता या मोटे बालों वाला। जो साधक अभेद भाव से आत्मा पर ध्यान कर सकते हैं, वे प्रथम श्रेणी के अधिकारी (अधिकारी) हैं। जो आत्मा पर ध्यान नहीं कर सकते, उन्हें नीचे दिए गए उन वस्तुओं में प्रभु का ध्यान करना चाहिए। इस प्रकार का ध्यान मध्यम श्रेणी के साधकों के लिए है।

इस श्लोक पर Ananda के साथ चिंतन करें

यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — Ananda कई परंपराओं से ज्ञान लेता है और आपके अपने मार्ग का सम्मान करता है।

हमारे साथ चलें

एक पाठ, एक प्रश्न, हर रविवार। कुछ और नहीं, कभी नहीं।

🌐 English  ·  हिन्दी