अधर्म की प्रधानता से, हे कृष्ण, परिवार की महिलाएं भ्रष्ट हो जाती हैं; और जब महिलाएं भ्रष्ट हो जाती हैं, हे वार्ष्णेय (वृष्णि वंश के वंशज), तो वर्णों का मिश्रण उत्पन्न होता है।
अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे शब्दों के अर्थ समान स्रोत से हैं। स्रोत
1.41 अधर्माभिभवात् अधर्म की प्रधानता से? कृष्ण हे कृष्ण? प्रदुष्यन्ति भ्रष्ट हो जाती हैं? कुलस्त्रियः परिवार की महिलाएं? स्त्रीषु महिलाओं में? दुष्टासु (भ्रष्ट) होने से? वार्ष्णेय हे वार्ष्णेय? जायते उत्पन्न होता है? वर्णसङ्करः वर्णों का मिश्रण।कोई भाष्य नहीं।
इस श्लोक पर आनंद के साथ चिंतन करें
यह श्लोक आपके अंदर क्या जागृत करता है? कुछ भी पूछें — आनंद कई परंपराओं से ग्रहण करता है और आपके अपने पथ का सम्मान करता है।
1.41 अधर्माभिभवात् अधर्म की प्रधानता से? कृष्ण हे कृष्ण? प्रदुष्यन्ति भ्रष्ट हो जाती हैं? कुलस्त्रियः परिवार की महिलाएं? स्त्रीषु महिलाओं में? दुष्टासु (भ्रष्ट) होने से? वार्ष्णेय हे वार्ष्णेय? जायते उत्पन्न होता है? वर्णसङ्करः वर्णों का मिश्रण।कोई भाष्य नहीं।