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भगवद् गीता 1.29

सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति | वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ||१-२९||
sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati . vepathuśca śarīre me romaharṣaśca jāyate ||1-29||
मेरे अंग शिथिल हो गए हैं और मेरा मुख सूख गया है, मेरा शरीर काँप रहा है और मेरे रोम खड़े हो गए हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: स्वामी शिवानंद (1942) · नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ एक ही स्रोत से हैं। स्रोत

1.29 सीदन्ति शिथिल होना? मम मेरा? गात्राणि अंग? मुखम् मुख? च और? परिशुष्यति सूखना? वेपथुः काँपना? च और? शरीरे शरीर में? मे मेरा? रोमहर्षः रोमांच? च और? जायते उत्पन्न होना।कोई टिप्पणी नहीं।

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